Motivational stories | moral stories

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       ♡ कर्तव्य और परिस्थिति ♡   

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     एक राजा लोगों से प्राय: 

       यह प्रश्न किया करते थे कि 

 संसार में सबसे बड़ा कर्तव्य क्या है ?


     पंडित , विद्वान किसी के उत्तर से 

            राजा संतुष्ट नहीं हुए.

      एक बार राजा शिकार के लिए

                जंगल में गये.

       जानवर के पीछे भागते-भागते 

      राह भटक गये और प्यास के मारे 

               बुरा हाल हो गया.

           भीषण गर्मी के कारण 

            उन्हें चक्कर आने लगा.


     सामने एक झोपड़ी दिखी, जहाँ 

            एक संत ध्यानस्थ थे.

      राजा उन्हें पुकारते बेहोश हो गये.


       संत ध्यान तोड़ उठे और झट

    राजा के ऊपर पानी के छीटे डाल कर

             उन्हें होश में लाए.

    राजा ने विनम्रता पूर्वक पूछा ~ 

    भगवन ! आप तो समाधी में थे.

 मेरे लिए समाधी क्यों भंग कर दी ?


      संत ने उत्तर दिया ~ राजन !

         आपके प्राण संकट में थे.

      ऐसे समय .... ध्यान से ज्यादा 

    आपके प्राणों की रक्षा महत्वपूर्ण था.


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  मनुष्य को 

   समय और परिस्थिति के अनुसार

   कर्तव्य का निर्धारण करना चाहिए.

                मैंने वही किया.

राजा को अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया.

          मनुष्य, कर्तव्य का निर्णय 

      समय और परिस्थिति के अनुसार

    करने लगे तो समस्या के समाधान में 

                 देर नहीं लगेगी.


                वर्तमान में लोग 

         अधिकार की लड़ाई को ही 

     अपना परम कर्तव्य समझने लगे हैं.

     जिससे समस्याएं बढ़ती जा रही हैं.


    

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          बोध कथा ~ नमक

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माँ ने पड़ोसी के दरवाज़े पर दस्तक दी,

   और उनसे थोड़ा सा नमक माँगा.

             पास ही बैठा बेटा,

          ये नज़ारा देख रहा था.


माँ के अंदर आने पर बेटा कहने लगा ~

       माँ, कल ही तो बाजार से 

 नमक लाया था मैं, तो फिर आपको

 पड़ोसी से माँगने की क्या ज़रूरत थी ?


          माँ कहने लगी, बेटा,

             हमारे पड़ोसी ग़रीब हैं, 

          वो कभी-कभी हमसे कुछ

               माँगती रहती है.


   मुझे मालूम है कि हमारे किचन में 

    नमक रखा है, फिर भी मैंने उनसे 

        नमक इसलिए माँगा, ताकि

        वो हमसे कुछ माँगते वक़्त 

          कभी भी हिचकिचाहट या 

       शर्मिन्दगी महसूस न करे, बल्कि

                वो ये समझे कि ...

     पड़ोसियों से ज़रूरत की चीज़ें 

        माँगी जा सकती हैं , और ये 

          पड़ोसी का अधिकार है.

       धन्य है ऐसे सद्विचारों वाली

               भारतीय माँ.

       खूबसूरत समाज ऐसी माँ के 

         सद्विचार से ही बनता है.

    जो परिवार का ही नहीं, अपितु 

   अपने पड़ोसियों के खान-पान और 

     मान-सम्मान का भी ध्यान रखना 

                 जानती है.

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